सूरज की हर किरण गवाह है, पसीने के हर बूंद का,
जो गिरता है ज़मींन पर सींचता है, जीवन का हर कोना,
सूरज गवाह है, उन सुखी टहनियों का भी जो अकाल में
सूख गयी थी, पसीना भी वहीँ ठिठक गया था!!
उनकी सांसे रौंद जाती है, उन फटी हुई एंडियों सी जमींन को!
सूरज की हर किरण गवाह है, उन बेतहासा पिघले सांसों का,
जिसमे मन्नत में जलाये दीपक बहाए जाते हैं, जंगली सूखे फूल, और
बचाकर रखे पसीने के चंद बूंद से, शिव प्रतिमा पर अर्घ्य डाले जाते हैं.
सूरज की हर किरण से अलग है यह भोर देखो वहां.....................!!
विशाखा ........
No comments:
Post a Comment