Saturday, May 7, 2011

बेटी रानी-रानी बेटी

जब जन्म लिया था , जब निकली थी गर्भ से 
तभी ही पिता के आँखों में सपने देखे थे मैंने 
मेरे लिए जो कि धुन्दले थे स्पष्ट न था कुछ- भी 
मेरे लिए.

हाँ 'माँ ' वही जिसने जन्म दिया इस बच्ची को !
उसकी आँखों में भी देखे मैंने सपने मेरे खातिर 
जो पिता से भिन्नतर थे . 

माँ कहती  (रानी बेटी),, पिता कहते (बेटी रानी ) 
दोनों में बड़ी उलटबांसी देखी मैंने.

अस्तीत्व की लड़ाई "बेटी" या "रानी ",
खुद को ढूँढती   थी , उस बचपन की मासूम निगांहों से 
माँ की आँखों और पिता की धुंदली आँखों में.

बड़ा राज़ है यहां माँ की आंखे किसान के खेत की तरह 
पिता की रेगिस्तान के रेत की तरह . 
इसी उहापोह में बढ़ी , तब भी इसी सवाल को ढोती रही ,
पिता की ऑंखें रेगिस्तान से क्यूँ मिलती है ?जो दिखता कुछ 
है ,, और है और !

मेरे पिता की आँखों में पानी भी मृग- मरीचिका लगी है मुझे 
जब -जब वो बही  है .

उस रेगिस्तान में मै जाउंगी एक बार जब तपन कम 
होती है ढूँढूउँगी   मै उसके अन्दर मानसरोवर ...
क्यूँ- कि मै जानती हूँ मेरे पिता की आँखों में जो धुन्दलापन 
है वह यूँ ही नहीं है ! कुछ भी यूँ ही नहीं होता ...


विशाखा......


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