कुछ समय पहले ही मैंने उस उम्रदराज़ महिला को देखा था
जो चौराहे पर खरी रही थी, धूप की गर्मी ने जिसे पिघला दिया था,
मोम बना दिया था! अचानक आ बैठी मेरे पास, हैरानी हुई मुझे!!
मै व्याकुल हुई और पूछ बैठी,, कौन हो तुम ? आई हो क्यों मेरे पास
क्या है मुझसे आस ? उसने जवाब दिया और कहा मै तो तुम ही हूँ !!
तुम्हारा भविष्य, जो तुमने देखा था और अब वह सामने है,, तुम अकेली
नही, बस चलो चलती जाओ पा लोगी अपना वर्त्तमान!!!! और चली गयी
अनंत में विलीन हो गयी,, अब भी सोचती हूँ !!! की आखिर मै कौन हूँ??
क्या यह केवल सवाल है या मेरा अस्तित्व ?? जो भी है!!! बस है..
न सवाल न ही कोई जवाब. बस अहसास!!!!!!
विशाखा.....
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