Saturday, April 23, 2011

मैं हवा हूँ , नदी भी! बहती हूँ और बहती जाती हूँ , 
ओस का बूंद पीती , हवा पर जीती......हूँ !
मैं एक पंख वाली चिड़िया हूँ .

 मैं तो एक पहेली हूँ , उलट पलट इस दुनिया से भ्रमित,  
मैं  एक पंख वाली चिड़िया हूँ. 

उस नदी किनारे वाली वृक्छ की डाल पर रहती हूँ 
नदी मेरा आइना है , कभी वो मुझ में बहती है , 
कभी मैं  उसमें, हवा मेरे संग डाल पर बैठ गुनगुनाती 
है, बादल हलके फुलके बादल आ मेरे पास ठहरते  हैं 
उड़ने क़ी प्रेरणा देते है. 

सूरज रोज मेरे सिरहाने बैठता है अग्नि प्रज्वलित 
करता है, मैं उसकी इक उम्मीद हूँ ,,
इसी उम्मीद के  दामन से रोज़ खुद को कसती हूँ और कसती 
ही जाती हूँ .  मैं नदी हूँ बहती ही जाती हूँ , मैं हवा हूँ लहराती 
जाती हूँ , मैं एक पंख वाली चिड़िया हूँ . 

मैं अनोखी हूँ अलबेली हूँ ,मैं एक पंख वाली चिड़िया हूँ! 

वि्शाखा…

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