Monday, September 13, 2010

भावना

भावनाओं   की  एक विशालकाय लहर उठी  थी, अभी-अभी!!!!
मैंने उसे एक हाथ से इशारा किया और वह किसी
वफादार कुत्ते सी  दुम हिलाने लगी
ऐसा लगा जैसे वह कभी उठी  ही नहीं थी  .
सदियों से बैठी  थी .
 काश!!!!! ऐसा होता मेरी भावनाएँ
मेरे प्रति वफादार होतीं .

विशाखा .......

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