भावनाओं की एक विशालकाय लहर उठी थी, अभी-अभी!!!!
मैंने उसे एक हाथ से इशारा किया और वह किसीवफादार कुत्ते सी दुम हिलाने लगी
ऐसा लगा जैसे वह कभी उठी ही नहीं थी .
सदियों से बैठी थी .
काश!!!!! ऐसा होता मेरी भावनाएँ
मेरे प्रति वफादार होतीं .
विशाखा .......
विशाखा .......
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