मै क्यू इन्तज़ार करती हूँ तुम्हारा,
ट्क ट्की लगाए, क्यू मै, बैठी रहती हूँ,
सुबह शाम अपने झरोखे मे इस इन्तज़ार
मे कि तुम आओगे
पर तुम नही आते!!
तुम क्यू नही आते इसका पता
तो नही मुझे पर इतना पता है,
कि मै, जिस शिद्द्त से तुम्हारा इन्तज़ार
कर रही हू तुम आओगे ज़रुर,
इसका मुझे पता है।
मैने ज़िद ठानी है,
तुम आओगे, ज़रूर आओगे।
विशाखा…………
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